Search My Blog

Friday, April 1, 2011

Ajanmi Bachchi .

सूरज की रौशनी सी चमकना चाहती हूँ मैं |
चाँद की शीतल चांदनी बनना चाहती हूँ मैं |
तितली हूँ अभी छोटी सी पर खोलना चाहती हूँ मैं |
पर ना क़तर माली मेरे,
तेरा सहारा बनना चाहती हूँ मैं |
माँ के सीने से लग रोते रोते,
सोना चाहती हूँ मैं|
जनम लेने दो मुझे,
दुनिया देखना चाहती हूँ मैं|
इन्देर्धनुष के दोनों छोर को,
मिलाना चाहती हूँ मैं|
कृति हूँ ईश्वर की,
इसमें रंग भरना चाहती हूँ मैं|
ईश्वर ने बनाया मुझे,
ईश्वर की रचना देखना चाहती हूँ मैं|
क्या खता है मेरी,
सजा सुनना चाहती हूँ मैं|
(दुनिया लूटा दूओंगी मैं, तुझे बचाना चाहती हूँ मैं )

No comments:

Post a Comment