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Monday, January 29, 2018

आईना और आदमी
एक दूजे को निहारते |
खूबसूरत आदमी |
आईना बदरंग चेहरा | 
कौन उपटन
लगाए आदमी |
पोंछ पोँछ थका आईना |
आदमी सूखा चूका
आँखों में नमी |

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फिर की है कोशिश
गुलाब उगाने की |
बस काँटों तुम सच्चे
दोस्त बन पाओ

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देख इंसानी सोच, काश गजब हो जाए |
रास्ता, खुद रास्ता बदलना सीख जाए |

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राहें भी अब,
इंसानो से परहेज,
करने लगी हैं |
देखते ही साया,
भीड़ बने इंसानो का,
अपनी ही राह बदलने,
लगी हैं ||
डरी हैं..
सहमी हैं |
होली बेमौसम,
होने लगी है ||
जानें कौन सा
साया आ जाए |
मेरे रुखसारों पर रक्तरंजित
गुलाल बहा जाए |

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अपने ही कांधे,
शव अपना लादे चले हैं |
उसपे अफवाह ये है,
कि, ज़िंदा है आदमी || 

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