मन का हिलोर
आम शब्दों में, आम इंसान की, कुछ आम सी भावनाएं ।
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Saturday, May 2, 2015
फिर खिले हैं
इस बार
अनेको स्वेत पुष्प
पहाड़ों में ।
शायद मौन समझौता
हुआ
प्रकृति, मानव बीच
जाड़ों में ।
क्यों क्रोधित ज्वलित है
दुल्हन ।
क्यों सीना चीर
रक्त बहा
नदी नालों में ।
सुना हमने
ग्रहण लगा
कहारों में ।
रामेश्वरी
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