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Sunday, February 13, 2011

prem


मैं हीर हूँ, मैं राँझा हूँ
तू पतंग मैं तेरी मांझा हूँ
रेत से लहर ने मिटा दिया
दर्रों में मैं ताजा हूँ
मैं नदी हूँ तू लहर है
मैं तेरे साँझा साँझा हूँ

तू मजनू है मैं लैला हूँ
प्रेमियों का मेला हूँ
मैं सोनी हूँ मैं महिवाल हूँ
दोनों के बीच खींची एक दीवार हूँ
दोनों जिसे तोड़ न सके वो दर्रा हूँ वो दीवार हूँ

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